प्रेरणादायक हिंदी कहानी-
यह कहानी एक चोर और उसके पिता की है, जो दोनों ही चोरी करते थे। मरते समय पिता ने बेटे को दो सीख दी — पहला, चोरी के बाद कभी धार्मिक स्थान पर मत जाना और दूसरा, पकड़े जाने पर कभी चोरी स्वीकार मत करना।
एक दिन चोरी के बाद चोर भागते-भागते आश्रम में पहुंच गया, जहां सत्संग चल रहा था। वहां उसने सुना कि "देवी-देवताओं की परछाई नहीं होती।" बाद में जब उसे चोरी के आरोप में पकड़ा गया, तो नकली देवी बनाकर उससे सच उगलवाने की कोशिश की गई। लेकिन चोर ने देवी की परछाई देखकर धोखे को समझ लिया और चोरी करने से इनकार कर दिया। उसकी सूझबूझ के कारण उसे निर्दोष मानकर छोड़ दिया गया।
यह कहानी एक चोर की है जिसके पिता भी एक चोर थे । दोनो बाप बेटा चोरी करते थे । एक दिन उस चोर के पिता बहुत बीमार हो गये और अपने जीवन का अंतिम समय गिनने लगे । अंतिम बार अपने बेटे को मिलने के लिए बुलाया । और अपने बेटे से कहा की मै तो चोर था हि तुम भी चोर बन गये । अब तो मै यह दुनिया छोड़ के जा रहा हुन लेकिन जीवन मे मेरी ये दो बाते याद रखना ।
पहला चोरी करते समय या उसके बाद कभी भी धार्मिक स्थान पर मत जाना । नहीं तो तुम अपने काम से पिछड़ जाओगे । दूसरी बात यह है की चोरी करते समय यदि पकड़े गये तो कभी स्वीकार मत करना की चोरी मैने हि की है । चाहे जो हो जाए । चाहे कितनी भी यातनाये क्यो ना दी जाए । इतना कहकर ओ मर गये । कुछ दिनों लड़का चोरी करना चालु कर दिया । समय बीतता गया ।
एक दिन वो किसी के घर चोरी करने गया ताला तोड़ा और जैसे हि आलमारी से समान निकालने लगा वैसे हि घर के लोगो को पता चल गया । घर के लोग हल्ला करने लगे तुरंत उसे पकड़ने के लिए सिपाहि बुला दिये । चोर भागने लगा भागते भागते एक आश्रम मे पहुंच गया । तब तक उसके पिता जी की बात याद आई की किसी भी धार्मिक स्थान पर नहीं जाना है । वहा आश्रम मे सत्संग चल रहा था । चोर ने सोचा की चलो आ तो गये है लेकिन कुछ सुनूंगा नहीं अपने कानो मे मे उंगली लगा लेता हुन फिर भी आवाज़ आ रही थी । तो उसने बस इतना सुना की महात्मा जी कह रहे है की देवी देवता की परछाई नहीं होती । उसके बाद जैसे हि चोर बाहर गया सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया । और राजा के पास ले गये ।
उस राज्य का नियम था की जब तक अपराधी यह स्वीकार ना कर ले की उसने अपराध किया है तब तक उसे सजा नहीं मिल सकती । राजा उससे पूछने लगे की क्या तुमने चोरी की है यह बात चोर मानने को तैयार हि नहीं था की उसने चोरी की है । राजा अपने सिपाहियों को आदेश दिये की इसे ले जाकर कबूल कराओ की चोरी इसने हि की है । सिपाही उसे ले गया बहुत कोशीश किया बहुत मारा लेकिन चोर यह मानने को तैयार हि नहीं था । तब मंत्री दिमाग़ लगाया की पता करो की यह किस देवता को मानता है तो पता चला की यह देवी मा को मानता है । उसने एक औरत को बुलाया और उस औरत को नकली देवी बनाया । नकली शेर पर बिठा दिया गया । वह औरत देवी की तरह दिखने लगी ।
अब रात मे उस औरत को उस चोर के समाने दिखाया गया । अचानक से दरवाजा खुला अचानक से देवी प्रकट हुई । उस चोर को लगा की सच मे देवी आ गई है । उसने देवी से कहा की मा तुम आ गई मुझे यहा से बचा लो । तो वह औरत जो देवी बनी थी उसने कहा की बचा तो लूंगी लेकिन पहले यह बताओ की क्या सच मे तुम चोरी किये हो । उस जेल मे मसाले जल रही थी । उस मसाले के उजाले मे उसने देवी की परछाई दिखी और उसको यह बात याद आ गई की देवी देवता की परछाई नहीं दिखति है । उस चोर को समझ मे आ गया की मेरे साथ धोखा हो रहा है ।
तो चोर ने कहा की मा मैने तो चोरी नहीं की है यदि चोरी की होती तो आपको पहले पता होता । उस जेल के बाहर राजा के सिपाही और मंत्री छुपे थे उस चोर का जवाब सुनने के लिए । जब इतना सुने तो उनको विश्वास हो गया की चोरी इसने नहीं की है । उस चोर छोड़ दिया गया । इसके बाद चोर ने सोचा की जब सत्संग की दो बाते इतना लाभदायक है । तो क्यो ना पूजा किया जाय । उसके बाद उसने चोरी छोड़ दिया ।
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इस कहानी को पढ़ने के लाभ
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नैतिक शिक्षा: कहानी सिखाती है कि सत्य और धैर्य हमेशा विजय दिलाते हैं। चोर ने सत्य पर अडिग रहकर अपनी बेगुनाही साबित की।
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सत्संग का महत्व: एक छोटी सी सीख — "देवी-देवता की परछाई नहीं होती" — ने चोर की जान बचा ली। यह दिखाता है कि सत्संग और अच्छी संगति हमारे जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।
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धार्मिक विश्वास पर चिंतन: कहानी दर्शाती है कि केवल अंधविश्वास के बजाय ज्ञान और विवेक का उपयोग करके हम सच और झूठ में फर्क कर सकते हैं।
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परिवार के संस्कारों का प्रभाव: पिता की दी गई सीख ने चोर के निर्णयों को प्रभावित किया, जिससे पता चलता है कि जीवन में माता-पिता की सलाह कितनी मूल्यवान होती है।
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सकारात्मक परिवर्तन: कहानी प्रेरणा देती है कि बुरे रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति भी सही दिशा में कदम बढ़ा सकता है और एक अच्छा इंसान बन सकता है।
इस कहानी से हमारे जीवन में उपयोगी सीख
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सत्संग और ज्ञान का महत्व: कहानी बताती है कि एक छोटी सी ज्ञान की बात भी हमारे जीवन में बड़े संकट से बचा सकती है। सही समय पर सही सीख बहुत कारगर साबित होती है।
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सत्य और धैर्य: जीवन में चाहे जितनी कठिन परिस्थिति आ जाए, सत्य का साथ देने से अंततः विजय होती है। चोर ने सत्य पर अडिग रहकर खुद को निर्दोष साबित किया।
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चतुराई और विवेक: कठिन परिस्थितियों में जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बुद्धिमानी और सूझबूझ से काम लेना ही सही मार्ग है। चोर ने देवी की परछाई देखकर धोखे को समझा, जिससे उसकी जान बच गई।
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अच्छी संगति का प्रभाव: अच्छे विचार, अच्छी संगति और धार्मिक शिक्षाएं व्यक्ति के जीवन को सही दिशा में मोड़ सकती हैं।
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संस्कारों की शक्ति: माता-पिता की सिखाई बातें जीवन के कठिन दौर में मार्गदर्शन का काम करती हैं।
निष्कर्ष: यह कहानी हमें सिखाती है कि सत्संग, सत्य, धैर्य और बुद्धिमानी का महत्व हमारे जीवन में सफलता और सुरक्षा का आधार बन सकता है।







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